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राजस्थान : इतिहास एवं कला-संस्कृति
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मैनीहिर, सांगोरा वृत्त (Crain), मिट्टी का बड़ा टीला और मोनोलिथ प्राप्त हुए। बैराट में अशोक के अभिलेख के समक्ष एक चबूतरे की खुदाई से 60 सेमी. की गहराई से एक बड़े मटके में दो गोलाकार पात्र एवं कुछ अस्थियां प्राप्त हुई थीं। डी.एच. गॉर्डन के अनुसार जब तक अलवर और भरतपुर क्षेत्र में व्यापक खोजबीन और अवशेषों की उचित जांच नहीं की जाती तब तक सांगोरा, मेगालिथ और आवास स्थल महापाषाणकाल से संबंधित समस्या को हल करने हमारी बहुत कम मदद कर सकते हैं।
(i) पुरा पाषाण काल
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निम्न पुरापाषाण काल – राजस्थान के संदर्भ में निम्न पुरापाषाण के उपकरण वर्तमान से लगभग 5,00,000 से 50,000 वर्ष पूर्व के मध्य का अवधि के हैं। निम्न पुरापाषाणकालीन स्थल मुख्यतः अरावली के पूर्व में केंद्रित हैं। अरावली के पश्चिम में भी इसकी उपस्थिति दर्ज की गई है।
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राजस्थान से प्राप्त निम्न पुरापाषाण उपकरणों में हस्त कुठार (Handaxe), खुरचनी (Scrapers), सामान्य फलक (Simple Flakes), ब्लेड्स, चॉपर-चॉपिंग व विभाजनी (Cleavers) शामिल हैं। उपकरण निर्माण में प्रायः क्वार्ट्जाइट प्रयुक्त होता है, जो नदी तल से गोलाश्म/कंकड़ (Pebbles) के रूप में प्राप्त किया जाता है।
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राजस्थान में निम्न पुरापाषाण काल के एक से अधिक विकास के चरण रहे होंगे। यहां निम्न पुरापाषाण संस्कृतियों व मध्य पुरापाषाणिक संस्कृतियों के मध्य संक्रमण और रूपान्तरण की प्रक्रिया ज्ञात नहीं है।
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1950 और 1960 के दशक में पुरा पाषाणकरण विशेषतः