१. बड़ली का शिलालेख
- समय: 443 ईसा पूर्व (लगभग)
- भाषा: प्राकृत (कुछ अंश प्राचीन संस्कृत), लिपि: ब्राह्मी
- स्थान: यह अजमेर जिले के बड़ली गाँव में भिलोत माता के मंदिर से प्राप्त हुआ था।
- खोजकर्ता: 1912 में गौरीशंकर हीराचन्द ओझा
वर्णन:
यह राजस्थान का अब तक का सबसे प्राचीन शिलालेख है। इसे कई टुकड़ों में पाया गया था और यह राजस्थान में जैन धर्म की उपस्थिति का सबसे पुराना पुरातात्विक प्रमाण माना जाता है। इसे साली मालिनी नामक राजा ने अंकित करवाया था तथा इसमें 84 स्तंभ शलाका का उल्लेख है। वर्तमान में यह अजमेर के राजपूताना संग्रहालय में सुरक्षित है।
२. घोसुंडी शिलालेख
- समय: दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व
- भाषा: संस्कृत, लिपि: ब्राह्मी
- स्थान: चित्तौड़गढ़ जिले के नगरी (मध्यमिका) के पास घोसुंडी गाँव से प्राप्त हुआ।
- खोजकर्ता: कविराजा श्यामलदास (इसे सबसे पहले डॉ. डी.आर. भंडारकर ने पढ़ा था)
वर्णन:
यह राजस्थान के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण है। यह राज्य में वैष्णव (भागवत) धर्म के प्रचार-प्रसार और गजवंश के राजा सर्वतात द्वारा 'अश्वमेध यज्ञ' किए जाने का सबसे प्राचीन प्रमाण है। वर्तमान में यह उदयपुर संग्रहालय में सुरक्षित है।